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सतलुज नदी में गाद से संभावित खतरे की पहचान कर जल्द दें रिपोर्ट – उपायुक्त

शिमला 21 फरवरी

उपायुक्त शिमला एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अनुपम कश्यप ने उपमंडल दण्डाधिकारी सुन्नी को सतलुज नदी में गाद जमा होने से संभावित खतरे की पहचान कर उसकी रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय को प्रेषित करने निर्देश दिए हैं ताकि गाद निकालने का कार्य जल्द आरंभ किया जा सके।

इसके अतिरिक्त, गाद जमा होने से विभिन्न विभागों, घरों, जमीन, पानी की स्कीम, पावर हाउस, सड़कों, सीवेज लाइनों और गौशाला को हुए नुकसान की भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

उपायुक्त सतलुज नदी में गाद निकालने के कार्य को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में सुन्नी में गाद जमा होने की गंभीर समस्या और वन विभाग द्वारा गाद हटाने को लेकर दी गई रिपोर्ट पर चर्चा की गई।

उपमंडल दण्डाधिकारी सुन्नी राजेश वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि तहसील सुन्नी के अंतर्गत मोहाल अनु से मोहाल लुनसु तक के हिस्से को, जो झूले वाले पुल के पास है और जो मोहाल लुनसु को तहसील करसोग से जोड़ता है, को संवेदनशील क्षेत्र के तौर पर अधिसूचित किया जाए। उन्होंने बताया कि निकाली गई गाद के स्टोरेज और डिस्पोजल के लिए सतलुज नदी के बाएं किनारे पर जमीन की पहचान कर ली गई है।

उपायुक्त ने कहा कि सतलुज नदी में गाद का यह मामला सुन्नी क्षेत्र के लोगों के लिए बेहद गंभीर मामला है जिससे उनके घरों और जीवन को खतरा बना हुआ है। इसलिए इस मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार कर प्रेषित की जाए ताकि आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा सके।

बैठक में अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी प्रोटोकॉल ज्योति राणा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ यशपाल रांटा, डीएसपी विजय रघुवंशी, अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग राजेश अग्गरवाल, रेंज वन अधिकारी देवी सिंह, सहायक अभियंता विद्युत उमंग गुप्ता, सहायक अभियंता जल शक्ति विभाग नागेंद्र सिंह रावत, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से डॉ नेहा शर्मा और गौरव मेहता भी उपस्थित रहे।

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